राजेश वर्मा (सांसद, खगड़िया) – जन्म, शिक्षा और राजनीति की पूरी कहानी

राजेश वर्मा — संघर्ष, सेवा और संसद तक की यात्रा

भारत के युवाओं के लिए राजनीति में प्रवेश करना अक्सर आसान नहीं होता। लेकिन राजेश वर्मा की कहानी यह दिखाती है कि किस तरह मेहनत, पढ़ाई, सामाजिक सेवा और संगठनात्मक कुशलता के बल पर एक युवा नेता संसद तक पहुँच सकता है।

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

राजेश वर्मा का जन्म 25 अगस्त 1992 को हुआ। उनका परिवार मूल रूप से भागलपुर, बिहार से संबंध रखता है। पारंपरिक रूप से स्वर्णकार (सोने-चाँदी के व्यवसाय) से जुड़े परिवार में जन्म लेने के कारण वे बचपन से ही व्यापारिक अनुशासन और सामाजिक जुड़ाव की बारीकियाँ समझते रहे। यही पृष्ठभूमि उन्हें लोगों की समस्याओं को नज़दीक से समझने और समाधान सोचने की दृष्टि देती है।

शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

राजेश वर्मा ने प्रारंभिक शिक्षा बिहार में प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए भोपाल चले गए।
उन्होंने सागर इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नॉलजी (SISTec), भोपाल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 2014 में वे स्नातक हुए।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने व्यापार और रियल एस्टेट क्षेत्र में कदम रखा। उनके इस अनुभव ने उन्हें प्रबंधन और योजनाबद्ध कार्यशैली की समझ दी, जो आगे चलकर राजनीति में काम आई।

राजनीति में प्रवेश — नगर निगम से संसद तक

सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हुए राजेश वर्मा ने स्थानीय राजनीति से अपने सफर की शुरुआत की।

  • 2017 में वे भागलपुर नगर निगम के उप महापौर चुने गए और दिसंबर 2022 तक इस पद पर कार्य किया।
  • इसी दौरान उन्होंने शहर में बुनियादी ढाँचा, साफ-सफाई और नई परियोजनाओं के लिए आवाज़ उठाई।
  • बाद में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से जुड़ने का निर्णय लिया।
  • मार्च 2022 में उन्हें पार्टी ने भागलपुर जिला अध्यक्ष बनाया, जिससे संगठनात्मक स्तर पर उनकी भूमिका और मजबूत हुई।

खगड़िया लोकसभा से जीत

2024 के आम चुनावों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उन्हें खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया।
युवाओं, किसानों और व्यवसायियों में उनकी अच्छी पकड़ के कारण उन्हें भारी समर्थन मिला और उन्होंने सीपीआई(एम) के संजय कुमार को हराकर जीत दर्ज की।
4 जून 2024 से वे लोकसभा सांसद के रूप में कार्यरत हैं।

संसदीय कार्य और प्राथमिकताएँ

सांसद बनने के बाद राजेश वर्मा ने अपने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी।

  • खगड़िया और आसपास के इलाक़ों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन के लिए नई योजनाएँ लाने की पहल की।
  • रेलवे व सड़क परियोजनाओं पर केंद्र और राज्य सरकार से विशेष ध्यान देने की मांग की।
  • युवाओं के लिए कौशल विकास और खेलों में अवसर बढ़ाने पर जोर दिया।

व्यक्तिगत जीवन और विचार

राजेश वर्मा खुद को एक “युवा प्रतिनिधि” मानते हैं। वे मानते हैं कि राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि केवल सत्ता का।
वे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म का उपयोग करके जनता से सीधे जुड़ते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं।
उनका उद्देश्य खगड़िया को एक मॉडल संसदीय क्षेत्र बनाना है, जहाँ बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश सब संतुलित तरीके से बढ़ें।

निष्कर्ष

राजेश वर्मा का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने क्षेत्र और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। एक साधारण व्यवसायी परिवार से निकलकर नगर निगम, जिला अध्यक्ष और फिर सांसद बनना यह दिखाता है कि यदि दृष्टि और ईमानदारी हो तो राजनीति में नई राहें बनाना संभव है।

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